आइये हम जानते हैं की भारतीय संविधान क्या है और इसका इतिहास कैसा है ?

सरल भाषा में अगर कहा जाये तो भारतीय संविधान एक ऐसी पुस्तक है जिसमें देश को अच्छे से संचालित करने के सभी  नियम हैं।  हमारे देश का  संविधान लिखित रूप में मौजूद है।  इस पुस्तक को ” कानून की किताब ‘भी कहते हैं। 

                         संविधान को बनाने में 2 वर्ष 11 माह 18 दिन का समय लगा था। डॉ भीम राव अम्बेडकर को ” संविधान का पिता ‘कहा जाता है। संविधान का निर्माण करने के लिए 1946 ई० में संविधान सभा ” का गठन किया गया था।  इस सभा के अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद थे। संविधान का निर्माण कार्य 26 नवंबर 1949 को पूरा हुआ। तथा इसको 26 जनवरी 1950 को पूरे भारतवर्ष में लागू  कर दिया गया।  जिस कारण  हम 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस ( Republic Day ) के रूपं में मानते हैं। 
                    
              भारतीय संविधान के मुख्य भाग निम्नलिखित हैं –
 1. एक प्रस्तावना / उद्देशिका 
 2. 12 अनुसूचियाँ
 3. 22  भाग
 4. 395 अनुच्छेद  ( कुल  467 अनुच्छेद )
                      भारतीय संविधान में अब तक 104 बार संशोधन किया जा चुका है। सबसे पहली बार संविधान संशोधन 1951 ई० में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व में हुआ था। 
                      

 संविधान सभा –

                    संविधान सभा का गठन 9 दिसंबर 1946 को हुआ था।  संविधान सभा के अस्थायी अध्यक्ष डॉ० सच्चिदानन्द सिन्हा  थे। पुनः 11 दिसंबर 1946 को संविधान सभा का स्थायी अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद  को बनाया गया। संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार बी० एन० राव ( बेनेगल नर्सिंग राव )  को बनाया गया। भारतीय संविधान का पहला मॉडल इन्होंने ही प्रस्तुत किया। राव द्वारा दिए गए मॉडल में कुल 243 अनुच्छेद तथा 13 अनुसूचियाँ थीं। राव द्वारा दिए गए मॉडल पर विचार करने के लिए एक प्रारूप समिति  का गठन किया गया। संविधान सभा में 13 दिसंबर 1946 ई० को पं० जवाहर लाल नेहरू ने उद्देश्य प्रस्ताव प्रस्तुत किया तथा इसी दिन संविधान सभा की कार्यवाही शुरू की गयी।  22 जनवरी 1947 को उद्देश्य प्रस्ताव को स्वीकार किया गया। संविधान सभा के कुल 11 अधिवेशन  हुए थे। संविधान सभा में कुल 165 दिन   बैठकें हुयी थीं। संविधान पर अंतिम हस्ताक्षर 24 जनवरी 1950 को हुआ था। संविधान सभा में कुल 15 महिलाएं सदस्य थीं।  जिसमें से केवल  8 महिलाएं  ही संविधान पर हस्ताक्षर कीं। 

 प्रारूप समिति –

               प्रारूप समिति में कुल सदस्यों की संख्या 7 थी। सदस्य – डॉ० भीम राव अम्बेडकर , एन० गोपाल स्वामी आय्यंकर , कृष्ण स्वामी अय्यर , के० एम० मुंशी , सैय्यद मुहम्मद शादुल्ला , बी० एल० मित्र , डी० पी० खेतान  । बी० एन० राव द्वारा दिए गए मॉडल को संशोधित करके भीम राव अम्बेडकर ने दूसरा मॉडल बनाया। इसमें मॉडल में कुल 15 अनुच्छेद तथा कुल 8 अनुसूचियाँ थीं। संविधान पर चर्चा के लिए कुल 3 वाचन  कराये  गए। 
प्रथम वाचन4 नवम्बर 1948 से 9 नवम्बर 1948 तक। 
द्धितीय वाचन15 नवम्बर 1948 से 17 अक्टूबर 1949 तक। 
तृतीय वाचन14 नवम्बर 1949 से 26 नवम्बर 1949 तक। 
    दूसरा वाचन सबसे लम्बे समय तक चला। बी० एल० मित्र का स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण उन्होंने त्यागपत्र दे दिया तथा उनके स्थान पर एन० माधव राव कार्यरत हुए। डी० पी० खेतान की मृत्यु के पश्चात टी० पी० कृष्णनचारी ने पदभार संभाला।   26 नवम्बर 1949 को संविधान बनाकर तैयार हो गया। परन्तु इसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया।  हालाँकि 26 नवम्बर 1949 को 15 अनुच्छेदों को भारत में लागू कर दिया गया था। 

प्रस्तावना ( उद्देशिका ) –

                              भारतीय  में उद्देशिका की व्याख्या की गयी है। उद्देशिका सर्वप्रथम ( 13 दिसंबर 1946 ) संविधान सभा में नेहरू ने प्रस्तुत किया।  उद्देशिका को भारतीय संविधान में आस्ट्रेलिया के संविधान से प्रभावित होकर लिया गया है। 1960 ई० में बेरुवारी मामले में सर्वोच्च न्यायलय  ने उद्देशिका को संविधान का अंग मानने से मना कर दिया था। हालाँकि जहाँ पर संविधान की भाषा अस्पष्ट होगी तो उसे समझने के लिए प्रस्तावना  की सहायता ली जा सकती है। 1973 ई०  में केशवानन्द भारती मामले में  सर्वोच्च न्यायलय  ने अपने निर्णय को पलटते हुये प्रस्तावना को संविधान का अभिन्न अंग माना तथा कहा कि संविधान के मूल ढांचे में कोई परिवर्तन नहीं  हो सकता यद्यपि इसमें अलग से शब्दों को जोड़ा जा सकता है। प्रस्तावना न्याय योग्य नहीं है अर्थात इसके आधार पर कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता है। गोलकनाथ मामले में सर्वोच्च न्यायलय  
 ने प्रस्तावना को ” मूल आत्मा ” माना है। पं० जवाहर लाल नेहरू ने प्रस्तावन को ” संविधान की कुंजी ” कहा है।

    प्रस्तावना में लिखे शब्द –

हम भारत के लोग , भारत को सम्पूर्ण समाजवादी , पंथनिरपेक्ष , लोकतान्त्रिक गणराज्य बनाने के लिए 
तथा उसके समस्त नागरिकों को –
सामाजिक , आर्थिक और राजनितिक न्याय विचार , अभिव्यक्ति , विश्वास , धर्म और उपासना की स्वतंत्रता को प्राप्त करने के लिए प्रतिष्ठा और अवसरों की समता तथा उन सब में 
व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता को सुनिश्चित करने वाली बंधुता 
बढ़ाने के लिए ढृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में 
आज तारीख 26 नवम्बर 1949 ई० मिति मार्ग शुक्ल सप्तमी संवत 2006 विक्रमी को एतत द्वारा इस संविधान को 
अंगीकृत , अधिनियमित तथा आत्मअर्पित करते हैं।

 

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