आइये ” सिंधु घाटी की सभ्यता ” के बारे में कुछ रोचक तथ्यों को जानते हैं।

➡️ सिंधु घाटी सभ्यता की खोज ( 1921 ई० में ) ” रायबहादुर दयाराम साहनी ‘‘ ने की थी।
➡️ सिंधु सभ्यता की तिथि 2400 ईसा पूर्व से 1700 ईसा पूर्व ( लगभग ) तक मानी गयी है।
➡️  सिंधु सभ्यता को प्रागैतिहासिक या कांस्य युग की श्रेणी में रखा जाता है।
➡️  इस सभ्यता के प्रमुख निवासी द्रविण एवं भूमध्य सागरीय थे।
➡️  सिंधु सभ्यता की सीमाएं – पश्चिम में दाश्क नदी के किनारे स्थित सुतकागेंडोर ( बलूचिस्तान ) , पूरब में     हिण्डन नदी के किनारे आलमगीरपुर ( मेरठ, उत्तर प्रदेश ) , उत्तर में चिनाव नदी के तट पर अखनूर के पास माँदा ( जम्मू – कश्मीर ) तथा दक्षिण में गोदावरी नदी के तट पर दाइमाबाद ( अहमदनगर , महाराष्ट्र ) तक।
➡️  सिंधु घाटी की सभ्यता एक नगरीय सभ्यता थी।  इस सभ्यता में प्राप्त 6 परिपक्व ढाँचे के नगर – मोहनजोदड़ो , हड़प्पा , गणवारीवाला , धौलावीरा , राखीगढ़ी एवं कालीबंगन 
➡️  हड़प्पा संस्कृति के सर्वाधिक स्थल गुजरात में खोजे गए हैं।
➡️  सिंधु सभ्यता के दो प्रमुख बंदरगाह – लोथल एवं सुतकोटदा
➡️  कालीबंगन से जुते हुए खेत तथा नक्काशीदार ईंटों का साक्ष्य मिलता है।
➡️  सिंधु सभ्यता की सबसे बड़ी ईमारत मोहनजोदड़ो में स्तिथ अन्नागार भवन थी।
➡️  मोहनजोदड़ो से प्राप्त एक विशाल स्नानागार था जिसकी लम्बाई 11.88 मीटर , चौड़ाई 7.1 मीटर और गहराई 2.3 मीटर है।
➡️  लोथल एवं कालीबंगन से अग्निकुण्ड प्राप्त  है।
➡️  तीन मुख वाले देवता ” पशुपति नाथ ” की मूर्ति मोहजोदड़ो से प्राप्त हुआ है। जिनके चरों ओर हाथी , चीता एवं भैंसा विराजमान हैं।
➡️  मोहनजोदड़ो से एक नर्तकी की काँसे से बनी एक मूर्ति मिली है।
➡️  हड़प्पा सभ्यता की मुहरों पर श्रृंगी पशु ( सिंह वाला पशु )  अंकन मिलता है।
➡️  सिंधु सभ्यता की लिपि ” भावचित्रात्मक ” है।  ये लिपि दायीं से बायीं ओर लिखी जाती थी। इसमें अभिलेखों की पंक्तियाँ यदि एक से अधिक होती थीं तो पहली पंक्ति दाएं से बाएं तथा  दूसरी बाएं से दाएं लिखी जाती थी।
➡️  सिंधु सभ्यता के लोगो की घरों तथा नगरों का विन्यास के लिए ” ग्रीड पद्धति ” के आधार पर थी।
➡️  लोथल तथा चम्बूदड़ो में मनके बनाने के कारखाने मिले हैं।
➡️  इस सभ्यता में लोगों की घरों की खिड़कियां और दरवाजे सड़क की तरफ न खुलकर पीछे की तरफ खुलते थे। लोथल नगर के घरों के दरवाजे केवल सड़क की तरफ खुलते थे।
➡️  सिंधु सभ्यता की मुख्य फसल गेहूं और जौ  थे।
➡️  ये लोग स्वाद में मिठास के लिए ” शहद ” का प्रयोग करते थे। 
➡️ चावल के सर्वप्रथम प्रमाण लोथल से मिले हैं।
➡️ सिंधु सभ्यता के दौरान लोथल , कालीबंगन और सुतकोतदा से घोड़े के अस्थिपंजर मिले हैं।
➡️ सिंधु सभ्यता के लोग यातायात के लिए दो पहिया वाहन , चार पहिया वाहन , बैलगाड़ी तथा भैंसागाड़ी का प्रयोग करते थे।
➡️  पिगाटे  ने मोहनजोदड़ो तथा हड़प्पा को एक विशाल साम्राज्य की जुड़वाँ राजधानी ” बताया है।
➡️  इस सभ्यता के लोग धरती को ” उर्वरता की देवी ” मानकर उसकी पूजा करते थे।
सिंधु सभ्यता से शिव-पूजा तथा वृक्ष-पूजा के प्रमाण मिले हैं।
➡️ स्वस्तिक चिन्ह ( ) अनुमानतः हड़प्पा सभ्यता की देन है। इस चिन्ह से सूर्य की उपासना के बारे में अनुमान लगया जाता है।
➡️  इस सभ्यता से किसी भी मंदिर के साक्ष्य नहीं मिले हैं।
➡️ सिंधु सभ्यता में ” मातृदेवी की उपासना ” अधिक प्रचलन में थी।
➡️ इस सभ्यता के लोगों के लिए जानवरों में ” कुबड़ वाला साँड़ ” विशेष पूजनीय था।
➡️ सैंधव सभ्यता ” मातृसत्तात्मक ” थी क्योंकि वहाँ पर स्त्रियों की मिट्टी की मूर्तियाँ  मिली हैं।
➡️ सिन्धुवासी सूती और ऊनी वस्त्रों का प्रयोग करते थे।
➡️ सिन्धुवासी अपने मनोरंजन के लिए  शिकार करना , पशु – पक्षियों को आपस में लड़ाना , पासा खेलना , मछली पकड़ना आदि साधनों का प्रयोग करते थे।
➡️ सिंधु सभ्यता से किसी भी प्रकार के तलवार का साक्ष्य नहीं मिला है।
➡️  वैश्यावृति तथा पर्दा-प्रथा का प्रचलन था।
➡️ इस सभ्यता में मृतकों को जलाने और दफ़नाने की प्रथा थी। मोहनजोदड़ो में जलाने और हड़प्पा में शवों को दफ़नाने की प्रथा प्रचलन में थी।
➡️ सिंधु सभ्यता में अग्निपूजा की प्रथा के साक्ष्य मिले हैं।
➡️ सिंधु सभ्यता के विनाश का अनुमानतः कारण बाढ़ थी।

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