विषाणु (Virus) क्या होता ? कोरोना वायरस क्या है और ये इतना घातक क्यों है ?

          

       विषाणु –

                        

 

           विषाणु एक अतिसूक्ष्म और अकोशिकीय जीवधारी है जिसे हम नंगी आँखों से नहीं देख सकते। विषाणु केवल जीवित कोशिका में ही वृद्धि कर सकते हैं। ये प्रोटीन और नाभिकीय अम्ल से मिलकर बने होते हैं। किसी शरीर में प्रवेश करने से पहले ये मृतक होते हैं लेकिन जैसे ही किसी जीवित कोशिका वाले शरीर में प्रवेश करते हैं तो जीवित हो जाते हैं। कोई विषाणु बिना किसी सजीव माध्यम के विकास और अपना पुनः उत्पादन नहीं कर सकता।  यह शताब्दियों तक विरामावस्था या सुशुप्त अवस्था में रह सकता है ऐसा इसलिए संभव है क्योंकि ये अकोशिकीय जिव होता है और जब यह किसी जीवित प्राणी के संपर्क में जाता है तो पुनः जीवित हो जाता है और उस जीवधारी की कोशिकाओं को संघटित कर देता है जिसके उपरांत वह जीवधारी बीमार हो जाता है।  कुछ तो ऐसे विषाणु होते हैं जिनमें पुनरुत्पादन की क्षमता बहुत अधिक होती है।  देखते ही देखते ये अपनी संख्या को करोड़ो – अरबों में बढ़ा लेते हैं।  इसी प्रकार की विषाणुयें ही बहुत घातक साबित होती हैं। विषाणु जब किसी जीवित कोशिका में प्रवेश करता है तो उसके डीएनए तथा आरएनए की जेनेटिक संरचना को अपनी जेनेटिक सुचना  देता है इसका अर्थ ये है कि विषाणु उस जीव की कोशिका को अपने नियंत्रण में कर लेता है जिससे वह विषाणु अपने ही जैसे दूसरे विषाणुओं का उत्पादन करता है। 
          विषाणु शब्द के अंग्रेजी वायरस का शाब्दिक अर्थ विष होता है। सर्वप्रथम डॉ एडवर्ड जेनर ने सन 1796 ई० में पता लगाया कि चेचक बिमारी विषाणु के कारण होती है। उन्होंने चेचक के टीके का अविष्कार भी किया। सन 1886 ई० में अडोल्फ मेयर ने पता लगाया कि तम्बाकू में एक विशेष प्रकार का विषाणु पाया  जिससे मोजेक नामक रोग होता है। 
         
          विषाणु , लाभदायक और हानिकारक दोनों प्रकार के होते हैं। जीवाणुभोजी विषाणु एक लाभदायक विषाणु है जो हैजा , पेचिश , टायफाइड आदि रोग उत्पन्न करने वाले जीवाणुओं को मार कर हमारे शरीर को उनसे बचाता है। कुछ हानिकारक विषाणु पेड़-पौधों में रोग उत्पन्न करते हैं। एचआईवी , इन्फ्लुएंजा का  विषाणु  , पोलियो का विषाणु रेबीज के विषाणु , चेचक के विषाणु इत्यादि रोग उत्पन्न करने वाले प्रमुख विषाणु हैं। विषाणु जल , वायु तथा किसी ठोस पदार्थ या मनुष्य के संपर्क से संचरित होते हैं। लेकिन कुछ ऐसे विषाणु भी हैं जो किसी विशेष प्रकार के माध्य द्वारा संचरित होते हैं। 
 

विषाणु के प्रकार –

परपोषी प्रकृति के आधार पर विषाणुओं को तीन भागों में बाँटा गया है –
1. पादप विषाणु (Plant Virus)
2. जंतु विषाणु (Animal Virus)
3. जीवाणुभोजी (Bacteriophage Virus)
 

कोरोना वायरस –

 

             कोरोना वायरस कई प्रकार के विषाणुओं का समूह है।  यह सामान्यतः स्तनधारी तथा पक्षी वर्ग के जीवों में रोग उत्पन्न करता है। यह विषाणु मानवों के श्वसन तंत्र में संक्रमण उत्पन्न कर देता है जिससे उसमे सूजन हो जाती है।  सूजन अधिक हो जाने पर व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है। यह मुर्गा-मुर्गियों को भी स्वसन सम्बन्धी रोग उत्पन्न करता है। इस विषाणु के संक्रमण से मनुष्य में सर्दी , खाँसी , जुकाम आदि जैसी सामान्य लक्षण दिखाई  हैं। इस विषाणु के संक्रमण के रोकथाम के लिए अभी तक कोई टिका या वैक्सीन नहीं बनायी गयी है।  इससे उपचार के लिए जीवधारी अपने रोग प्रतिरोधक क्षमता पर ही निर्भर रहता है। 
            चीन के वुहान शहर से उत्पन्न होने वाला नोवल कोरोना वायरस ( Covid-19 ) इसी विषाणु के समूह का है।  हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन ( WHO ) ने इस विषाणु का नाम Covid-19 रखा है। ये वायरस अब तक एक महामारी का रूप ले चुकी है। पूरे विश्व में अब तक कोरोना से पीड़ित मरीजों की संख्या 42,17,348 हो चुकी है। केवल भारत में अब तक 67,152 मरीज इस से ग्रसित हैं। कोरोना को मार्च 2020 में वैश्विक महामारी (Pandemic ) घोषित कर दिया गया था। 
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